जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय एक बार फिर छात्र राजनीति और वैचारिक जंग का अखाड़ा बन गया। शुक्रवार को विश्वविद्यालय के ‘मानविकी पीठ सभागार’ में आयोजित एक महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम को लेकर जमकर बवाल हुआ। NSUI कार्यकर्ताओं ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘एजेंडा’ बताकर विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन मौके पर तैनात भारी पुलिस बल के आगे उनकी एक न चली।
बैरिकेड्स पर चढ़े NSUI कार्यकर्ता, पुलिस ने घसीटा
शुक्रवार दोपहर राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दर्जनों NSUI कार्यकर्ता नारे लगाते हुए कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता रोक रखा था। आक्रोशित कार्यकर्ता पुलिस से भिड़ गए और बैरिकेड्स फांदने की कोशिश करने लगे। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने सख्त एक्शन लिया और प्रदर्शनकारियों को सड़क पर घसीटते हुए हिरासत में लेकर बस में भर दिया।
मरुधरा नारी संगठन का कार्यक्रम
दरअसल, यह पूरा विवाद ‘मरुधरा नारी संगठन’ के बैनर तले आयोजित एक विचार गोष्ठी को लेकर था। NSUI का आरोप है कि यह संगठन RSS से जुड़ा है और इसके जरिए विश्वविद्यालय परिसर में एक विशिष्ट दक्षिणपंथी विचारधारा को थोपा जा रहा है। NSUI नेता अमरदीप परिहार ने दोटूक कहा, ‘विश्वविद्यालय ज्ञान और लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र है, इसे किसी विचारधारा की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे।’ संगठन ने पूर्व में हुए ‘शस्त्र पूजन’ का हवाला देते हुए इसे शैक्षणिक माहौल के खिलाफ बताया।
ABVP का पलटवार- महिलाओं के सम्मान का विरोध क्यों?
दूसरी ओर, ABVP इस कार्यक्रम के समर्थन में मजबूती से खड़ी नजर आई। एबीवीपी के विश्वविद्यालय संयोजक भारत भूषण ने कहा कि यह कार्यक्रम विशुद्ध रूप से महिला सशक्तिकरण पर आधारित है और इसका विरोध करना NSUI की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अन्य राजनीतिक विचारधाराओं के कार्यक्रम होते हैं, तब NSUI खामोश रहती है, लेकिन राष्ट्रीय विचारों के नाम पर उन्हें आपत्ति होने लगती है।
कुलपति की सफाई- हमने तो सिर्फ हॉल किराए पर दिया
बढ़ते विवाद के बीच विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अल्पना कटेजा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियम अनुसार ‘मरुधरा नारी संगठन’ को सभागार किराए पर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में यह किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन का कार्यक्रम नहीं है। इस घटनाक्रम ने राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की सुगबुगाहट को भी हवा दे दी है।

