जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं–रिपोर्ट-रानू पांडेय
मोंठ–मोठ तहसील के ग्राम लड़ावरा के लक्ष्मी नारायण मंदिर कमेटी द्वारा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण जन्म की पावन कथा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचक रवि बादल ने बताया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, अत्याचारी राजा कंस के अत्याचारों से पूरी मथुरा नगरी त्रस्त थी।कथा व्यास ने कहा कि भगवान की भक्ति से बढ़कर इस संसार में कोई साधन नहीं है। जब मनुष्य अहंकार, लोभ और क्रोध को त्यागकर सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, तभी उसके जीवन में शांति और आनंद आता है। उन्होंने समझाया कि भगवान का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि सज्जनों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में परिवारों में प्रेम, संस्कार और आपसी विश्वास की सबसे अधिक आवश्यकता है। माता-पिता को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने चाहिए और युवाओं को नशे व बुराइयों से दूर रहना चाहिए। कथा व्यास ने बताया कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए।कथा पारीक्षत ज्योति अखलेश राजपूत ने आरती की।इस मौके पर ग्राम प्रधान सुरेंद्र राजपूत,विपिन,शिवचरन पांचाल,शिवम,आकाश राजपूत,किशन सविता सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

